पूटकी,आस्छे बछर आबार होवे ” नारे के साथ मूर्ति का विसर्जन
पूटकी : बरारीकोक मे दुर्गा पूजा के दशमी मे प्रातः घट विसर्जन के समय “सिंदूर खेला” की पौराणिक परंपरा है , इस सिंदूर खेला मे सुहागिन महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाकर उनके सुहाग के मनोकामना करती है. शहर के विभिन्न पूजा पंडाल पूटकी, बरारीकोक केंदुआ करकेन्द भागाबाँध अन्य पूजा मंडप के सुहागिन महिला सदस्यों ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर दुर्गा पूजा के शुभकामनाएं दी.घट विसर्जन करने के लिए महिला ,पुरुष ,बच्चे, बुजुर्ग सभी मिलकर गाने पर थिरकते हुए, गाजे बाजे के साथ तलाव में जाकर ” आस्छे बछर आबार होवे ” नारे के साथ कलश का विसर्जन किया गया.वही बरारी कोक के समाजसेवी रंजीत आर्या ने झारखंड वासियों के सुख समृद्धि के लिए माता से प्रार्थना भी किया ओर कहा की मै ओर मेरा परिवार वर्षो से माँ दुर्गा की पूजा अर्चना करते आ रहे है, आज हर्षोल्लास के साथ माता का मूर्ति विसर्जन कर रहे है.साथ ही जिला प्रशासन को भी धन्यवाद दिया.
