केंदुआ बाजार में पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस ।
केन्दुआ बाजार में पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा का चतुर्थ दिवस ।
कथा पांडाल में पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर केन्दुआ थाना प्रभारी अपने दल बल के साथ श्री प्रमोद कुमार पांडे जी पधारे ।और व्यासपीठ से आशीर्वाद प्राप्त कर उन्होंने कथा का भावपूर्वक श्रवण किया। इस दौरान हरिदास जी ने भजन प्रस्तुत किया। वहीं श्री प्रमोद कुमार पांडे जी ने प्रेरणादायक दो शब्दो से उपस्थित भक्तों को संबोधित किया। उन्होंने धर्म, संस्कार और भक्ति के महत्व को सरल शब्दों में समझाते हुए सभी को आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।

ध्रुव जी के जीवन से हमें यह गहन शिक्षा मिलती है कि जीवन में आने वाला अपमान, कष्ट या अस्वीकार भी हमारे उत्थान का कारण बन सकता है—यदि हम उसे सही दिशा दे दें। मात्र पाँच वर्ष की आयु में जब सौतेली माता के वचनों से उनका हृदय आहत हुआ, तब उन्होंने निराश होने के बजाय भगवान की शरण लेने का संकल्प किया। आयु छोटी हो या परिस्थितियाँ विपरीत, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन अटल हो, तो सफलता निश्चित है।
प्रह्लाद जी का जीवन हमें अडिग भक्ति, निर्भयता और क्षमा की महान शिक्षा देता है। प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। जब उनके पिता ने उन्हें भगवान का स्मरण छोड़ने के लिए अनेक प्रकार के कष्ट दिए—अग्नि, विष, हाथी, सर्प—तब भी प्रह्लाद का विश्वास तनिक भी डिगा नहीं। इस प्रसंग से पहली शिक्षा मिलती है कि सच्ची भक्ति परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होती। चाहे घर में विरोध हो या संसार में संकट, यदि मन भगवान में स्थिर है तो कोई भी शक्ति भक्त का कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
सृष्टि का प्रारंभ परमपिता परमात्मा की दिव्य इच्छा से हुआ। जब चारों ओर केवल अंधकार और जल ही जल था, तब भगवान ने अपनी योगमाया से सृष्टि रचना का संकल्प किया। भगवान की नाभि से कमल प्रकट हुआ, जिस पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए। प्रारंभ में उन्हें कुछ समझ नहीं आया कि वे कौन हैं और कहाँ से आए हैं। तब उन्होंने तप किया और भगवान की कृपा से सृष्टि रचना का ज्ञान प्राप्त किया।यह सृष्टि केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि ईश्वर की दिव्य लीला है। मानव जीवन का उद्देश्य केवल भोग नहीं, बल्कि इस सृष्टि के रचयिता को पहचानना और उनके प्रति कृतज्ञ रहना है।
भगवान हर जगह विराजमान हैं—कण-कण में, हमारे भीतर और बाहर भी। वे केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि सृष्टि के प्रत्येक अंश में व्याप्त हैं।भगवान कहते हैं कि वे सबके हृदय में स्थित हैं और सभी को उनके कर्मों के अनुसार मार्ग देते हैं। इसका अर्थ यह है कि भगवान बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि हमारे सच्चे मन, निष्कपट भाव और श्रद्धा को देखते हैं। यदि हमारा मन निर्मल हो, भावना सच्ची हो और कर्म पवित्र हों, तो हमें हर जगह भगवान का अनुभव होने लगता है।
आज के समाज में धर्म से दूरी बढ़ने के कारण संस्कारों की भी कमी स्पष्ट दिखाई देने लगी है। जब जीवन से धर्म का आधार हटता है, तो आचरण, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों में भी गिरावट आने लगती है। श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण, हमें आदर्श जीवन का मार्ग दिखाते हैं। इन ग्रंथों में बताया गया है कि जब मनुष्य धर्म का पालन करता है, तब परिवार, समाज और राष्ट्र सब मजबूत बनते हैं।इस कथा को सफल करने में सुधीर ठाकुर,मनोज रवानी दुलारी, संंजय ताम्रकार रेणु देवी, सुजीत ठाकुर पुनम देवी,अमित ठाकुर सोनाली देवी,दीपक ताम्रकार गुड़िया देवी,सोनू कुमार रेखा देवी ,गंगा प्रसाद गुप्ता, राजेश ताम्रकार,सुनिल कुमार शर्मा,सुजल कुमार,विनोद ताम्रकार,निखिल चौरसिया,अमित ताम्रकार, आदित्य गुप्ता,विक्रात रवानी,आलौक ताम्रकार चन्दन पौदार धीरज साव,आदि समस्त केन्दुआ बाजार नगर वासियों के सहयोग से किया जा रहा है।
कल दिनांक 23 /03/2026 दिन सोमवार को कृष्ण जन्मोत्सव बहुत धुमधाम से मनाया जाएगा
