केंदुआ.श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व भव्य तुलसी कलश यात्रा का आयोजन
केन्दुआ बाजार में पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व भव्य तुलसी कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस दिव्य यात्रा में हजारों की संख्या में भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कलश यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु महिलाएं सिर पर पवित्र कलश धारण कर सहभागी बनीं, वहीं पुरुष, युवा एवं बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ यात्रा में भाग लिया।पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज श्रीमद्भागवत कथा का प्रथम दिवस
किसी भी उत्सव का मूल्य इस बात से तय होना चाहिए कि वह हमारे समाज को क्या दिशा दे रहा है। यदि कोई परंपरा हमारी बहन-बेटियों की गरिमा, सुरक्षा और संस्कारों के विपरीत प्रतीत होती है, तो उसका हमे समर्थन नहीं करना चाहिए। हमें अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मर्यादा और नैतिक शिक्षा को सशक्त बनाना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी चरित्रवान, संवेदनशील और संस्कारवान बने। यही सच्चे अर्थों में समाज और राष्ट्र की रक्षा का मार्ग है।

भक्ति मीरा जी के जैसी होने चाहिए। सच्ची भक्ति वही है जिसमें स्वार्थ न हो, दिखावा न हो, केवल प्रेम हो—निर्मल, निष्कपट और अटूट प्रेम। जब भक्त का हृदय पूरी तरह प्रभु को समर्पित हो जाता है, तब हर परिस्थिति में वही नाम, वही स्मरण और वही आनंद रहता है। मीरा ने हमें सिखाया कि भक्ति का अर्थ है पूर्ण समर्पण, अटूट विश्वास और हर हाल में प्रभु का नाम लेना।
जिस घर में नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है और उस घर में सुख-शांति और समृद्धि स्वतः आती है। ऐसे घर में कलह कम और सद्भाव अधिक होता है। वहाँ बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होता है, क्योंकि वे सम्मान और संस्कार का वातावरण देखकर बड़े होते हैं। जिस घर में स्त्री सम्मानित, सुरक्षित और प्रसन्न रहती है, वही घर वास्तव में स्वर्ग समान बन जाता है, और वहाँ लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है।
अपना दुख संसार वालों को कभी नहीं बताना चाहिए। दुनिया में बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो सामने तो सहानुभूति जताते हैं, पर पीछे से उपहास करते हैं। अपना दुःख सिर्फ गोविन्द से कहना चाहिए , क्योंकि वही अंतर्यामी हैं—आपके हृदय की हर धड़कन, हर आंसू और हर भावना को बिना कहे समझते हैं। संसार के सहारे सीमित हो सकते हैं, पर प्रभु का सहारा असीम होता है। इसलिए संसार से अपेक्षा कम रखें, और अपने विश्वास को प्रभु में दृढ़ रखें। जो गोविंद पर भरोसा करता है, वह कभी अकेला नहीं रहता।
अपने बच्चों को धर्म की शिक्षा अवश्य दें और उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। जिस बच्चे के जीवन में धर्म का आधार होता है, उसका चरित्र मजबूत होता है। वह सही और गलत का अंतर समझता है, बड़ों का आदर करता है, छोटों से प्रेम करता है और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना सीखता है। धर्म जीवन को दिशा देता है, अनुशासन सिखाता है और कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।इस कथा को सफल करने में सुधीर ठाकुर,मनोज रवानी दुलारी, संंजय ताम्रकार रेणु देवी, सुजीत ठाकुर पुनम देवी,अमित ठाकुर सोनाली देवी,दीपक ताम्रकार गुड़िया देवी,सोनू कुमार रेखा देवी ,गंगा प्रसाद गुप्ता,जगदीप ताम्रकार,शंकर गुप्ता, राजेश ताम्रकार,नरेश ताम्रकार, सुजल कुमार,विनोद ताम्रकार,निखिल चौरसिया,दीपक ताम्रकार,धीरज साव,आदि समस्त केन्दुआ बाजार नागर वासियों के सहयोग से किया जा रहा है।
